नई दिल्ली(5 नवंबर): चीन के काउंसेल जनरल ज़ानुआ मा ने साफ किया, 'एनएसजी में भारत की सद्स्यता का चीन विरोध कर रहा है, ये सच नहीं है। दोनों देश एक दूसरे से इस संबंध में बातचीत कर रहा हैं।'
- उन्होंने कहा कि एनएसजी में सदस्यता के कुछ नियम होते हैं और उसकी एक प्रक्रिया होती है जिसे मानना होता है।
- भारत और पाकिस्तान के संबंधों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में चीन तटस्थ रवैया अपना रहा है।
- ज़ानुआ मा ने कहा, 'भारत और चीन दोनों एक दूसरे के प्रति दोस्ताना संबंध रखते हैं। लेकिन कुछ लोगों को इस बात पर विश्वास नहीं है। ये सच है कि दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर विवाद हैं, लेकिन कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर हम साथ हैं। जो विवदित मुद्दों की तुलना में ज्यादा हैं।'
हाल की घटनाएं कही न कही भारत के बर्दाश्त करने की हद पार कर जाने पर अब इतना साफ़ हो गया है की या तो चीन भारत के प्रति अपनी नीति पर पुनर्विचार करे क्योंकि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद अब स्थितियां तेजी से बदली है और चीन को आक्रामक तरीके से जवाब देने की कोशिश भी की जा रही है.
चीन के कम्युनिस्ट पार्टी पोलुत- ब्यूरो के शातिशाली नेता मेंग झियांग्ज़्हू 8 नवम्बर को भारत के दौरे पर आने वाले हैं, और उम्मीद है की भारत से सामरिक और कूटनीतिक समझौते होंगे. उम्मीद है की बातचीत का मुद्दा आतंकवाद भी रहे और इस से जुड़े समझौते भी हों, जिसके बाद भारत और चीन अपने पारंपरिक विरोध से इतर संबंधों के नए आयाम शुरू करंगें.
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