चालबाज चीन भारत को हर मोर्चे पर परेशना करने पर तुला है। NSG के मुद्दे पर चीन एकबार फिर भारत को धोखा दिया है। ड्रैगन के विरोध की वजह से न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यानी NSG में भारत को इस साल सदस्यता मिलने की संभावना तकरीबन खत्म गई है। वियना में NSG देशों की बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई है।
हालांकि जानकारों का कहना है कि यह भारत के NSG में जाने की प्रक्रिया 2017 में भी जारी रहेगी। भारत और अमेरिका बराक ओबामा के राष्ट्रपति कार्यकाल के पूरा होने से पहले इस प्रक्रिया के पूरा होने का प्रयास कर रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक इस साल के अंत तक यह प्रकिया पूरी हो जाएगी। सूत्रों के मुताबिक वियना में हुई बैठक भी उसी तरह से समाप्त हुई जिस तरह से सिओल बैठक हुई थी। हालांकि इस बार चीन की मांग- परमाणु अप्रसार संधि में शामिल नहीं होने वाले देशों के लिए मानक तय किए जाए, पर विचार किया गया।
इस साल जून में सिओल में बैठक के बाद भारत के NSG सदस्यता मिलने की उम्मीदें काफी बढ़ गई थी। इस बैठक में अर्जेंटीना के कूटनीतिज्ञ राफेल ग्रोसी को भारत की एप्लीकेशनल पर सहमति बनाने के लिए नियुक्त किया गया था। हालांकि चीन ने इस नियुक्ति को मानने से इनकार कर दिया था।
चीन लगातार भारत को NSG में शामिल किए जाने का विरोध कर रहा है। भारत ने भी कहा है कि चीन एकमात्र देश है जिसने उसका विरोध किया। हालांकि इसके बाद चीन के न्यूक्लियर नेगोशिएटर वांग कुन और भारत के निशःस्त्रीकरण के लिए संयुक्त सचिव अमनदीप सिंह गिल केबीच 13 सितम्बर और 31 अक्टूबर को बैठक हुई। इन बैठकों के बाद चीन भी चीन के रूख में खास बदलाव नहीं आया है।
चीन का कहना है कि भारत ने NPT पर दस्तखत नहीं किए हैं, लिहाजा हिंदूस्तान को NSG की सदस्यता नहीं दी जा सकती है। बताया जा रहा है कि वियना बैठक में NSG सदस्यों ने गैर NPT सदस्यों के प्रवेश को लेकर तकनीकी, कानूनी और राजनीतिक मामलों पर चर्चा की गई।
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