देशभर में नोटबंदी के बाद अब शराबबंदी कि आवाजे उठनी लगी है. पूरी दुनिया भारत कि जिस युवा ताकत से डरती वही भारत कि युवा पीढ़ी शराब कि लत में पड़ती जा रही है. शराब के कारण से रोड एक्सीडेंट में हर रोज कई जाने जाती है व कई बचे अनाथ हो जाते है तो घरो के चिराग भुज जाते है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त फैसला सुनते हुए कहा कि हाईवे पर शराब कि दुकाने नही होंगी. पिछड़े हुए राज्य बिहार में शराब बंदी के बाद वह के हालत सुधरे है व वह कि विकास दर बढ़ी है. सूत्रों के अनुसार अब मोदी सरकार शराब बंदी पर भी विचार कर रही है. भारत में शराब कि लत के कारण लाखो परिवारों कि जिन्दगी नरक बनी हुयी है. गुजरात आज इतना विकसित राज्य क्यों है इसका जवाब एक ही है कि गुजरात में कई सालो से शराब बंद है. सरकार जनता कि चिंता छोड़ अपना खजाना भरना चाहती है इस लिए जब भी शराब के खिलाफ आवाज उठी तो उसको दबा दिया गया. लेकिन अब मोदी सरकार से जनता को बहुत उम्मीदे है. क्या आप नशा मुक्त समाज देखना चाहते है, क्या आप भारत को आगे बढ़ता देखना चाहते है, तो आप भी इस मुहीम में शामिल होकर अपने देश के प्रति अपने समाज के प्रति अपनी जिमेदारी निभाए व लोगो को जागरूक करे
हाईकोर्ट ने शराब कि दुकानों को लेकर कहा कि ‘हम ये सुनिश्चित करेंगे कि हाईवे से न तो शराब की दुकानें नज़र आएं, न उन तक पहुंचना संभव हो’, ये बात सुप्रीम कोर्ट ने कही है. हाईवे पर शराब की दुकानों के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रखते हुए कोर्ट ने ये टिप्पणी की है.
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाएं पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडू और पुदुच्चेरी से जुडी थीं. लेकिन, कोर्ट के फ़ैसले का असर पूरे देश पर पड़ेगा. कोर्ट ने कहा है कि नेशनल हाईवे हो या स्टेट हाईवे, शराब की दुकानें कहीं भी चलने नहीं दी जाएंगी.
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भले ही हाईवे का कुछ हिस्सा शहर के बीच से गुज़रे, वहां शराब की दुकान नहीं होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट में हाईवे पर होने वाली सड़क दुर्घटना का मसला उठाया गया था. याचिका में कहा गया था कि इन दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह शराब पीकर गाड़ी चलाना है.
केंद्रीय सड़क और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 2014-15 में देश भर में कुल 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं. इनमें 1 लाख 46 हज़ार लोगों ने जान गंवाई. सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल अगस्त में इस मामले में केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया था. मामले को तेज़ी से सुनते हुए कोर्ट ने आज सुनवाई पूरी कर ली.
कोर्ट ने साफ किया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 से हर नागरिक को मिला जीवन का अधिकार बेहद अहम है. राज्यों को इसका सम्मान करते हुए अपनी आबकारी नीति में बदलाव करना होगा. उन्हें हाईवे के किनारे शराब की दुकानों को लाइसेंस देना बंद करना होगा.
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